Vol. 2 No. Issue: 6, August, 2025, Page, 1554-1561 (2025): ऋग्वैदिक काल में उत्पादन एवं उपभोग के स्वरूप: एक ऐतिहासिक-आर्थिक अध्ययन

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सारांश:
ऋग्वैदिक काल भारतीय इतिहास का वह प्रारंभिक चरण है, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन की आधारशिला रखी गई। इस काल की अर्थव्यवस्था मुख्यतः उत्पादन और उपभोग के सरल, सामुदायिक एवं प्राकृतिक स्वरूप पर आधारित थी। कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प और सीमित व्यापार इस काल के प्रमुख उत्पादन साधन थे, जबकि उपभोग सामाजिक आवश्यकताओं, धार्मिक अनुष्ठानों और सामुदायिक जीवन से जुड़ा हुआ था। प्रस्तुत शोधपत्र में ऋग्वैदिक काल की आर्थिक संरचना, उत्पादन के साधनों, श्रम व्यवस्था, उपभोग की प्रवृत्तियों, सामाजिक असमानताओं तथा आर्थिक जीवन के धार्मिक पक्ष का विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।

मुख्य शब्द:
ऋग्वैदिक काल, उत्पादन प्रणाली, उपभोग का स्वरूप, वैदिक अर्थव्यवस्था, पशुपालन, कृषि उत्पादन, हस्तशिल्प।

Published: 2026-02-24