Vol. 2 No. Issue: 6, August, 2025, Page, 1575-1580 (2025): वैश्वीकरण और हिंदी साहित्य
सारांश:
वैश्वीकरण ने विश्व को एक साझा आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मंच पर ला खड़ा किया है। इस प्रक्रिया ने न केवल बाजार और तकनीक को बदला, बल्कि भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना को भी गहराई से प्रभावित किया है। हिंदी साहित्य, जो सदैव भारतीय समाज की आत्मा का दर्पण रहा है, वैश्वीकरण के प्रभाव से अछूता नहीं रह सका। प्रस्तुत शोधपत्र में वैश्वीकरण की अवधारणा, उसके विभिन्न आयामों तथा हिंदी साहित्य पर पड़े उसके प्रभावों का समग्र विश्लेषण किया गया है। विशेष रूप से विषयवस्तु, शिल्प, भाषा, विमर्श, प्रवासी हिंदी साहित्य, बाजारवाद तथा डिजिटल माध्यमों की भूमिका पर विचार किया गया है। शोध का निष्कर्ष यह दर्शाता है कि वैश्वीकरण ने हिंदी साहित्य के समक्ष जहाँ अनेक चुनौतियाँ प्रस्तुत की हैं, वहीं नए अवसरों के द्वार भी खोले हैं।
मुख्य शब्द:
वैश्वीकरण, हिंदी साहित्य, बाजारवाद, सांस्कृतिक परिवर्तन, प्रवासी साहित्य।

